तंबूरा की धुन से मुंबई तक पहुंची सुनील लोधी की आवाज, ‘Hanuman Ansh’ ने बदल दी जिंदगी
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मध्य प्रदेश के सागर जिले के एक छोटे से गांव से निकली एक आवाज आज देशभर में लोगों का ध्यान खींच रही है। तंबूरा के साथ भजन गाने वाले सुनील लोधी को फिल्म Hanuman Ansh के चर्चित भजन ने एक नई पहचान दी है। खास बात यह है कि सुनील ने संगीत की दुनिया में किसी बड़े मंच से शुरुआत नहीं की, बल्कि गांव और आसपास के धार्मिक आयोजनों में भजन गाते हुए अपने सफर को आगे बढ़ाया।

जन्म से दृष्टिबाधित सुनील के लिए संगीत केवल रोजी-रोटी का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यही उनकी पहचान और आत्मविश्वास की ताकत बना। सोशल मीडिया पर उनके एक भजन की रिकॉर्डिंग वायरल होने के बाद उनकी आवाज गांव की सीमाओं से निकलकर मुंबई के रिकॉर्डिंग स्टूडियो तक पहुंची।
🎵 कौन हैं सुनील लोधी?
सुनील लोधी मध्य प्रदेश के सागर जिले के अगरा गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि से आता है और खेती तथा पशुपालन जैसे कामों से जुड़ा रहा है।
सुनील को बचपन से ही संगीत में रुचि थी। वह तंबूरा बजाकर भक्ति गीत और बुंदेली लोकगीत गाते रहे। शुरुआत में उनकी आवाज आसपास के गांवों और स्थानीय कार्यक्रमों तक ही सीमित थी, लेकिन धीरे-धीरे उनके गानों की रिकॉर्डिंग सोशल मीडिया पर पहुंचने लगी।
यहीं से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव शुरू हुआ।
📱 एक वायरल वीडियो ने बदल दी कहानी
सुनील के कई भजन और बुंदेली गीत ऑनलाइन पोस्ट किए जाते थे। इनमें ‘मोरे संकट के कटैया’ नाम की उनकी प्रस्तुति ने खास तौर पर लोगों का ध्यान खींचा।
सादगी से की गई रिकॉर्डिंग में सुनील तंबूरा बजाते हुए भजन गाते नजर आए। उनकी आवाज और गायकी की सहजता लोगों को पसंद आई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा।
इस वायरल प्रस्तुति ने संगीत निर्माता पंकज VRK का ध्यान भी आकर्षित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, पंकज ने सुनील की आवाज सुनी और फिर उनके बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश शुरू की। यही संपर्क आगे चलकर सुनील के लिए मुंबई जाने का रास्ता बना।
🎬 ‘Hanuman Ansh’ में कैसे मिला मौका?
सुनील की आवाज जब बड़े स्तर पर पहुंची तो उन्हें मुंबई बुलाया गया। इसके बाद उन्हें फिल्म ‘Hanuman Ansh’ के लिए भजन गाने का अवसर मिला।
फिल्म में उनका गाया भजन ‘Maine Tere Hi Bharose Hanuman, Sagar Mein Naiya Paar Dai’ दर्शकों के बीच चर्चा में आया। यह वही आवाज है जो कुछ समय पहले तक गांव के धार्मिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया की छोटी-सी दुनिया तक सीमित थी।
सुनील ने खुद फिल्म में अपने भजन को जगह मिलने पर खुशी और आभार जताया है। उन्होंने फिल्म के निर्देशक और पूरी टीम को अपनी इस यात्रा में महत्वपूर्ण बताया।
❤️ संघर्ष से पहचान तक का सफर
सुनील की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पास किसी बड़े संगीत संस्थान की चमकदार शुरुआत नहीं थी। उनके पास था तो सिर्फ संगीत के प्रति लगाव, तंबूरा और अपनी आवाज पर भरोसा।
स्थानीय स्तर पर वर्षों तक भजन गाने के बाद सोशल मीडिया उनके लिए एक ऐसा मंच बना, जिसने उनकी प्रतिभा को उन लोगों तक पहुंचाया, जिनसे वह शायद कभी सीधे नहीं मिल पाते।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी छोटे शहर या गांव की प्रतिभा को बड़े दर्शक मिल सकते हैं—अगर उसकी कला लोगों के दिल तक पहुंच जाए।
🏆 मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी किया सम्मान
सुनील लोधी की लोकप्रियता अब सरकारी स्तर पर भी पहुंच चुकी है। 3 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में सुनील और उनके माता-पिता से मुलाकात की।
मुख्यमंत्री ने सुनील की संगीत यात्रा की सराहना करते हुए ₹1 लाख की सम्मान निधि देने की घोषणा की। रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील की औपचारिक संगीत शिक्षा और आंखों से संबंधित इलाज में संभावित मदद को लेकर भी आश्वासन दिया गया।
यह सम्मान सुनील के लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा को मिली एक बड़ी सार्वजनिक पहचान भी है।
🌟 गांव का गायक, अब बड़े मंच की ओर
Hanuman Ansh में आवाज देने के बाद सुनील लोधी को संगीत की दुनिया में नए अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है। उनकी कहानी ने उन कलाकारों को भी उम्मीद दी है जो बड़े शहरों से दूर रहकर अपनी कला को जिंदा रखे हुए हैं।
एक तरफ गांव का सादा जीवन, दूसरी तरफ तंबूरा और भक्ति संगीत—और फिर सोशल मीडिया से मिली पहचान। सुनील लोधी का सफर दिखाता है कि कभी-कभी बड़े मंच तक पहुंचने के लिए शुरुआत किसी चमकदार स्टूडियो से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी रिकॉर्डिंग और सच्ची आवाज से होती है।
सुनील लोधी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। ‘Hanuman Ansh’ उनके सफर का एक बड़ा पड़ाव जरूर है, लेकिन उनकी आवाज अब गांव की सीमाओं से कहीं आगे निकल चुकी है।