अभिजीत दीपके के पिता की संपत्ति की जांच की मांग, CJP फंडिंग और आय पर उठे सवाल
Hidden Chapter | New Delhi
NEET परीक्षा विवाद के दौरान चर्चा में आए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके पिता भगवानराव दीपके की आय, कथित संपत्ति और संगठन की फंडिंग से जुड़े सवालों का है। सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार समेत कई सरकारी संस्थाओं से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल ये केवल शिकायतें और आरोप हैं। किसी भी सरकारी एजेंसी ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है और न ही अब तक किसी प्रकार की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है।
किन एजेंसियों से की गई शिकायत?
RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले में तीन अलग-अलग संस्थाओं को शिकायत भेजी है।
- चुनाव आयोग (ECI)
- केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC)
- महाराष्ट्र सरकार
शिकायत में अलग-अलग बिंदुओं पर जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
CJP के रजिस्ट्रेशन पर सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि CJP राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय है और सार्वजनिक रूप से आर्थिक सहयोग या डोनेशन स्वीकार कर रही है, तो उसे संबंधित कानूनों के तहत पंजीकृत होना चाहिए।
उनका दावा है कि यदि संगठन बिना आवश्यक पंजीकरण के राजनीतिक गतिविधियां चला रहा है या फंड एकत्र कर रहा है, तो इसकी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पिता की आय और अमेरिका में पढ़ाई को लेकर सवाल
शिकायत में अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके की आय का भी उल्लेख किया गया है।
आरोप लगाया गया है कि यदि वे महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MIDC) में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे और उनकी मासिक आय लगभग ₹60,000 से ₹65,000 के बीच थी, तो परिवार ने बच्चों की अमेरिका में उच्च शिक्षा का खर्च कैसे वहन किया।
शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार से इस पहलू की भी जांच कराने की मांग की है। फिलहाल इस विषय पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
₹1 करोड़ के लीगल फंड पर भी उठे सवाल
RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा CJP आंदोलनकारियों की कानूनी सहायता के लिए घोषित ₹1 करोड़ के फंड का भी उल्लेख किया है।
CBIC को भेजी गई शिकायत में इस फंड की प्रकृति और उससे जुड़े कर (Tax) संबंधी नियमों की जांच की मांग की गई है। हालांकि, इस संबंध में भी अभी तक संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या निर्णय सामने नहीं आया है।
आंदोलन की दिशा बदलने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि NEET परीक्षा से जुड़ा आंदोलन समय के साथ अपने मूल उद्देश्य से भटक गया।
उनका कहना है कि शुरुआत में यह आंदोलन छात्रों के हितों से जुड़ा था, लेकिन बाद में इसमें राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत टिप्पणियां शामिल होने लगीं। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
अभी तक किसी आरोप की पुष्टि नहीं
फिलहाल यह पूरा मामला शिकायतों और जांच की मांग तक सीमित है।
- किसी सरकारी एजेंसी ने आरोपों की पुष्टि नहीं की है।
- किसी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है।
- अभिजीत दीपके या उनके परिवार की ओर से भी इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले समय में चुनाव आयोग, CBIC और महाराष्ट्र सरकार इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करती हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।